उत्तराखंड:पहाड़ की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर पूरे उत्तराखंड में उबाल,CBI जांच की मांग को लेकर सड़कों पर उतरा जनसैलाब

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पहाड़ की बेटी अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी का नाम उजागर करने और सर्वोच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में पूरे मामले की सीबीआई जांच करने की मांग को लेकर उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक अब प्रदर्शनों का दौर जारी है… राज्य में अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन में अब महिलाओं का उग्र रूप देखने को मिल रहा है और हो भी क्यों ना…जब बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ का नारा बुलंद करने वाली पार्टी के हाकीम भी इस पूरे मामले पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं…पहाड़ के एक गरीब मां-बाप की बेटी अपने परिवार का पालन पोषण करने और अपने मां-बाप के जीवन यापन के लिए अपने घर से कई किलोमीटर दूर दो वक्त की रोजी-रोटी के लिए एक रिसॉर्ट में काम करने गई थी पर वहां इंसान के रूप में जानवर बन बैठे दरिंदों ने उस बेटी की बड़ी ही निर्दयता से हत्या कर दी…

सोचिए,जिस दिन उस गरीब मां-बाप की 19 साल की स्वाभिमानी बेटी अंकिता की हत्या हुई होगी उस दिन वो मदद के लिए चिल्लाई होगी और खुद को बचाने के लिए दरिंदों से गुहार भी जरूर लगाई होगी पर उसकी किसी ने एक न सुनी…पर अब उत्तराखंड में एक बार फिर वर्तमान समय में अंकिता को न्याय दिलाने के लिए जो आंदोलन हो रहे हैं उसे देखकर ऐसा लगता है मानो राज्य की हर मां और महिला अब अपनी बेटी अथवा अपनी बहन को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर उतर आई है…यकीन मानिए अगर अभी भी सोने का नाटक कर रही है ये सरकार नहीं जागी तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रही यही मां-बहने चंडी का रूप धारण करने में भी देर नहीं करेगी…आंखों में आंसू और हाथों में दराती लेकर चंडी का रूप धारण कर अंकिता को न्याय दिलाने के लिए पहाड़ की महिलाएं अब पूरे उत्तराखंड की सड़कों पर उतर गई है,देखिए अंकित भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर किस तरह से एक महिला जो खुद को भाजपा की पूर्व महिला मंडल अध्यक्ष बताते हुए भावुक हो गई,इस महिला के दिल से निकली बात को राज्य के प्रत्येक नागरिक को भी जरूर सुनना चाहिए…हालांकि हरिद्वार के भाजपा जिला अध्यक्ष का यह कहना है कि खुद को मंडल अध्यक्ष बताने वाली महिला न तो भाजपा में है और ना ही मंडल अध्यक्ष है…

(सौजन्य से,संवाद 365)

राज्य की सत्ता और संगठन से जुड़े लोगों को एक बात को समझ लेनी चाहिए कि अभी तो इस पूरे मामले को लेकर आक्रोशित महिलाओं ने बीते दिनों कोटद्वार में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को केवल काले झंडे दिखाएं थे पर अगर जल्द ही अंकित हत्याकांड से जुड़ी मांग पूरी नहीं होती है तो भाजपा नेताओं को प्रदेश में महिलाओ के उग्र आक्रोश का सामना भी करना पड़ सकता है…आने वाले समय में अगर इस पूरे मामले में किसी भाजपा नेता के मुंह पर आक्रोशित महिलाएं कालिख पोत दें या फिर जूते से उनकी पिटाई कर दे तो इसमें किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए…क्योंकि पहाड़ की बेटी को न्याय दिलाने के लिए अब चट्टान जैसे मजबूत इरादों के साथ पहाड़ की महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर पूरे प्रदेश में मोर्चा संभाल लिया है…वैसे भी वर्तमान समय में पहाड़ के संसाधनों पर ज्यादातर पूंजीपतियों का कब्जा हो रहा है और अगर अब भी पहाड़ के लोग अपनी अस्मिता के लिए नहीं जागे तो इसी प्रकार से आगे भी शासन सत्ता और संपत्ति के दम पर पहाड़ के लोगों का शोषण बदस्तूर जारी रहेगा …

(अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर पूर्व भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल महिलाओं के साथ प्रदर्शन करते हुए)

इसीलिए अब समय आ गया है कि सभी लोग मिलकर अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर अब एक हो जाए और खुलकर शासन-सत्ता से भी सवाल पूछे…गरीबों का शोषण करने वाले ऐसे लोगों को सबक सिखाएं और खास तौर पर अगर कोई सत्ता की हनक दिखाएं तो उसकी खातिरदारी जूतों से करने को भी तैयार रहे…दरअसल जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो ऐसे में प्रत्येक राज्यवासी को यह जरूर चिंतन करना चाहिए कि आखिरकार दानव बनकर पहाड़ की गरीब बेटियों पर गिद्ध दृष्टि डालने वाले ऐसे लोगों को इतना मजबूत कौन बना रहा है और कौन इन्हें बचा रहा है…लोगों को यह भी समझना चाहिए कि कैसे ये लोग मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखाकर आम लोगों के जनमत का सहारा लेकर शासन-सत्ता पर पहले तो काबिज हो जाते हैं और फिर उनका ही शोषण करते हैं…अंकिता भंडारी के बारे में कुछ भी कहने से पहले कम से कम प्रदेश के नेताओं यह सोचकर बयान देना चाहिए कि अंकित की जगह अगर उनकी बहन अथवा बेटी इस प्रकार के दरिंदगी का शिकार होती तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होती…

देवभूमि उत्तराखंड में किसी भी प्रकार का कुकृत्य करने वाले लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि यहां देवताओं का वास है,देवताओं की इस भूमि में मोक्ष देने वाले नारायण भी विराजमान है और न्याय के देवता गोल्ज्यू भी विराजमान है…ऐसे ही पूरा विश्व उत्तराखंड में आकर यहां के देवी देवताओं को नमन नहीं करता और अगर कोई क्षणिक शासन सत्ता के अहंकार में इस राज्य के भोले भाले लोगों को सताएगा अथवा अत्याचार करेगा तो निश्चित तौर पर वो एक बार भले ही सत्ता के दम पर कानून से बच जाए पर उत्तराखंड के देवी देवताओं का प्रकोप से उसे कोई नहीं बचा सकता…इतिहास गवाह है कि ऐसे लोगों पर यहां के देवी देवताओं का प्रकोप भी निश्चित ही बरपता है।